आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड
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आईएफसीआई वेंचर की स्थापना आईएफसीआई द्वारा वर्ष 1975 में इस उद्देश्य से की गई थी कि वह जोखिम पूंजी योजना के तहत मुख्य रूप से प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को जोखिम पूंजी मुहैया कराकर भारत में उद्यमियों के आधार को व्यापक बनाएगी । वर्ष 1988 में आइईएफसीआई वेंचर ने स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यीकरण के उद्देश्य से परियोजनाएं लगाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु प्रौद्योगिकी वित्त एवं विकास योजना शुरू की ।

 

1991 में आईएफसीआई वेंचर ने भारत के औद्योगिक क्षेत्रों की विभिन्न परियोजनाओं का प्रवर्तन करने के लिए एसयूयूटीआई तथा आईएफसीआई द्वारा आरम्भ की गई वेकास-।।। नामक उद्यम पूंजी निधि का प्रबन्धन किया । वेकास-।।। निधि को वर्ष 2007 में बंद कर दिया गया और पोर्टफोलियो की बकाया कम्पनियों को एसयूयूटीआई में अन्तरित कर दिया गया । इस फंड को वर्ष 2011-12 में पोर्टफोलियो बेचकर शासकीय रूप से बंद कर दिया गया ।

इस समय आईएफसीआई वेंचर सेबी द्वारा पंजीकृत 5 प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंड/अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) का प्रबन्धन कर रही है जैसे इण्डिया ऑटोमेटिव कम्पोनेटिव मैन्युफैक्चर्सस प्राइवेट इक्विटी फंड-।-डोमेस्टिक (आईएसीएम-आई-डी), ग्रीन इण्डिया वेंचर फंड (जीआईवीएफ), इण्डिया इन्टरप्राइज डिवेलपमेंट फंड (आईईडीएफ) तथा अनुसूचित जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड (वीसीएफ-एससी) व 848 करोड़ रुपए के कुल कॉपर्स के साथ पिछड़ी जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड (वीसीएफ-बीसी)। आईएफसीआई वेंचर कार्पस/निधियों की बकाया राशि पर प्रबन्धन शुल्क के माध्यम से शुल्क प्रबन्धन क्रियाकलापों से आय अर्जित कर रही है और इन निवेशों पर लाभ कमा रही है । उक्त के अतिरिक्त, तीन फंड जीआईवीएफ, आईएसीएम-1-डी तथा आईईडीएफ शीघ्र ही बंद होने वाले हैं और बकाया निवेशों से वसूली करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं ।

अनुसूचित जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड भारत सरकार का फंड है जिसमें सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय कार्यान्वयन एजेंसी है । वीसीएफ-एससी भारत में अपनी तरह का एक वेंचर कैपिटल फंड है जो अनुसूचित जातियों को रियायती वित्त प्रदान करके उद्यमीयता को बढ़ावा देता है । वर्ष के दौरान, सरकार ने वीसीएफ -एससी फंड के लिए 40 करोड़ रुपए की राशि का सहयोग दिया है । जिसके परिणामस्वरूप वीसीएफ-एससी फंड की राशि का कार्पस 330 करोड़ रुपए तक बढ़ गया । हाल में भारत सरकार ने पिछड़ी जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड के प्रबन्धन के लिए आईएफसीआई वेंचर को चयनित किया है और 10 करोड़ रुपए का आरम्भिक कार्पस प्राप्त किया जा चुका है ।

पीई/वीसी क्षेत्र में और अवसरों को प्राप्त करने के उद्देश्य से आईएफसीआई वेंचर अगले दौर की निधियों के जुटाने अर्थात् स्मॉल एण्ड मीडियम इन्टरप्राइज एडवांटेज फंड (एसएमईएएफ) तथा ग्रीन इण्डिया वेंचर फंड ।। (जीआईवीएफ-।।) की प्रक्रिया में लगा है जिसके लिए आईएफसीआई ने सैटलर तथा स्पॉन्सर के रूप में सहमति दी है और प्रत्येक फंड के लिए 50 करोड़ रुपए के सहयोग का वचन दिया है । प्रत्येक फंड का लक्षित कार्पस 500 करोड़ रुपए है जो एक ट्रस्ट फंड के रूप में जारी किया गया है और श्रेणी-।। अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) के रूप में सेबी के अधीन पंजीकृत है । जीआईवीएफ-।। और एसएमईएएफ के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया आरम्भ की जा रही है । सस्ते आवासों के लिए एक और फंड का शीघ्र ही शुभारम्भ किया जाना है ।

एनबीएफसी होने के नाते, आईएफसीआई वेंचर बैंक ऋणों और बांडों की मार्फत निधियां जुटाकर सम्पत्ति को बंधक और/या सूचीबद्ध कम्पनियों के शेयरों की प्रतिभूति पर कम्पनियों को 5 करोड़ रुपए से 25 करोड़ रुपए की रेंज में निगमित ऋण भी प्रदान करता है । ऋणों को मंजूर करने के लिए कम्पनी की सुपरिभाषित ऋण नीति है ।

कम्पनी ने 31 मार्च, 2018 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए ऋणों और निवेशों के लिए 22.42 करोड़ रुपए के निवल प्रावधानों के बाद, 87.46 करोड़ रुपए की कुल आय पर 5.22 करोड़ रुपए का निवल लाभ अर्जित किया है । कम्पनी की नेटवर्थ 222.99 करोड़ रुपए की रही । 31 मार्च, 2018 की स्थिति अनुसार, आईएफसीआई वेंचर की बही ऋण स्थिति 421.22 करोड़ रुपए तथा बांड व बैंक उधार 298 करोड़ रुपए के रहे ।