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अंतिम नवीनीकृत: 26-नवंबर-21

निदेशक बोर्ड

                                                                           

बोर्ड स्तरीय समितियों की संरचना

बोर्ड स्तरीय समितियों के विचारार्थ विषय

 

 

श्री मनोज मित्तल

प्रबन्ध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी

श्री मनोज मित्तल, आयु लगभग 54 वर्ष, जिनका नीतिगत लीडरशिप, बहु-कार्यात्मक विशेषज्ञता, वित्तीय कौशल और संगठनात्मक प्रक्रियाओं के निर्माण / अनुकूलन के माध्यम से संगठनात्मक विकास और लाभप्रदता को बढ़ावा देने में 3 दशकों से अधिक का ट्रैक रिकार्ड है ।

उन्होंने जनवरी, 2016 से जनवरी, 2021 तक भारतीय लघु विकास बैंक में उप प्रबन्ध निदेशक के रूप में कार्य किया है । वे सिडबी वीजन 2.0 के विकास और इसे वित्तीय रूप से सुदृढ़ प्रभावी संस्थान के रूप में उभरने के लिए इसके सफल कार्यान्वयन में निकटता से शामिल थे।

उन्होंने 2010 में ए.पी. एमएफआई संकट के दौरान एमएफआई को बैंकों की बकाया राशि की पुनर्संरचना और उधार देने की पहल के कार्यान्वयन में सर्वथा उचित भूमिका निभाई । उन्हें बहुपक्षीय एजेंसियों/भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित विभिन्न स्थिर और विकासात्मक कार्यक्रमों के डिजाइन, प्रबंधन और प्रभावी मूल्यांकन का व्यापक अनुभव है। वह एमएसएमई / स्टार्टअप्स, वित्तीय मध्यस्थों - बैंकों/ गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों/सूक्ष्म वित्त संस्थानों, वैकल्पिक निवेश कोषों को पूंजी (ऋण और इक्विटी) और विकास सहायता में विशेषज्ञता के साथ समग्र विकास के लिए क्रेडिट प्लस दृष्टिकोण के एक सुदृढ़ समर्थक हैं।

आईएफसीआई लि. के अतिरिक्त, श्री मनोज मित्तल स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लि., आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लि., आईएफसीआई फैक्टर्स लि. और आईएफसीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट लि. के बोर्ड में निदेशक हैं । श्री मनोज मित्तल प्रबन्ध विकास संस्थान, गुड़गावं और भारतीय उद्यमीयता विकास संस्थान के गवर्नर बोर्ड में भी हैं ।

श्री सुनील कुमार बंसल

उप प्रबंध निदेशक

श्री सुनील कुमार बंसल ने आईसीएआई, नई दिल्ली से चार्टर्ड एकाउंटेंट, आईसीडब्ल्यूएआई, कोलकाता से कॉस्ट एकाउंटेंट और इक्फाई, हैदराबाद से ट्रैजरी व फोरेक्स मेनेजमेंट में डिप्लोमा किया है । उन्होंने सीए फाइनल में अखिल भारतीय स्तर पर 23वीं रेंक हासिल की थी । श्री बंसल ने नाबार्ड में कई पदों पर कार्य किया है और उन्हें 35 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है, जिसमें से 22 वर्ष उन्होंने नाबार्ड में वरिष्ठ कार्यपालक के रूप में, निवेश प्रबन्धक, वित्तीय परामर्शदाता तथा डिवेलपमेंट बैंकर के रूप में कार्य किया ।

श्री बंसल को सिडबी, नैबकांस तथा नेबवेंचर जैसे संगठनों का संयुक्त रूप से 10 वर्ष का बोर्ड स्तरीय अनुभव है । श्री बंसल ने छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश राज्यों के क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रमुख, प्रभारी अधिकारी/मुख्य महाप्रबन्धक के रूप में कार्य किया है ।

श्री बंसल ने भारत सरकार द्वारा गठित महत्वपूर्ण समितियों जैसे (i) किसान क्रेडिट कार्ड योजना की समीक्षा के लिए वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मत्रालय, भारत सरकार द्वारा केसीसी पर गठित कार्य-दल (ii) ब्याज अनुदान व डीबीटी पर सारंगी समिति, और (iii) परियोजना प्रबन्धन ग्रुप, जहां वह ग्रुप के प्रमुख रहे जो नाबार्ड में वित्तीय तथा विकासात्मक उत्पादों के पुनः डिजाइन पर बोस्टन कंस्ल्टेंसी ग्रुप के साथ परामर्श आदि में सदस्य के रूप में भी अपनी विशेषज्ञता सिद्ध की है ।

श्री बंसल अनेक पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रमुख रहे हैं/में भाग लिया है, जैसे कि स्टडी ऑफ माइक्रो-क्रेडिट इंस्टीट्यूट्स इन फिलीपींस (1998), एक्सपोजर विजिट टू 05 यूरोपियन कंट्रीज ऑन 'मैनेजमेंट ऑफ चेंज' (2002), 'प्रोग्राम ऑन एडवांस्ड कॉर्पोरेट फाइनेंस' लंदन बिजनेस स्कूल, लंदन (2008), वित्तीय समावेशन और कृषि ऋण, ब्राजील (2014) आदि। श्री बंसल को निधि, तरलता व खजाना प्रबन्धन, वित्त और पर्यवेक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त है। उन्होंने एपेक्स को-ऑपरेटिव बैंकों के निवेश परिचालनों में जांच की हैं ।

आईएफसीआई के अतिरिक्त, श्री सुनील कुमार बंसल स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लि., आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लि., आईएफसीआई फैक्टर्स लि., आईएफसीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट लि. तथा एमपीकॉन लि. के बोर्ड में भी निदेशक हैं । श्री सुनील कुमार बंसल राष्ट्रीय ग्रामीण विकास निधि और इन्स्टिट्यूट ऑफ लीडरशिप डिवेलपमेंट के गवर्नर बोर्ड में भी हैं ।

 

 

डा. भूषण कुमार सिन्हा

 

डा. भूषण कुमार सिन्हा भारतीय आर्थिक सेवा के 1993 बैच के अधिकारी हैं । इस समय वह वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में संयुक्त सचिव के रूप में तैनात हैं ।

वर्ष 1993 में भारतीय आर्थिक सेवा में उनका प्रवेश उस समय हुआ जब भारत में आर्थिक सुधार प्रक्रिया आरम्भ हुई थी । तब से आईईएस के सदस्य के रूप में डा. सिन्हा ने विविध आर्थिक व वित्तीय मुद्दों जैसे अन्तरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों से भारतीय निगमों के लिए वित्त उपलब्ध कराना, देश के लिए विवेकसम्मत ऋण प्रबन्धन के समग्र ढांचे में बाह्य वाणिज्यिक ऋण प्रवाह को नियमित करना, भारतीय प्रतिभूति बाजार का विकास व उसका विनियमन, भारत सरकार के लिए पेंशन क्षेत्र के सुधारों का आरम्भ एवं समन्वय, भारतीय एमएसएमईसीज के प्रवर्तन एवं विकास के लिए नीतियां बनाना व उनका कार्यान्वयन पर कार्य किया ।

मई, 2018 में डीएफएस में कार्य-ग्रहण करने से पूर्व, डा. सिन्हा ने निवेश व सार्वजनिक परिसम्पत्ति प्रबन्धन विभाग (डीआईपीएएम) में आर्थिक सलाहकार के रूप में तीन वर्ष तक कार्य किया । इस अवधि के दौरान, भारत सरकार की पॉलिसी में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में "निवेश आधारित प्रक्रिया" से "निवेशों के कुशल प्रबन्धन" के सिद्धांत में परिवर्तन के प्रतिमान विस्थापन में वे अग्रणी रहे । डीआईपीएएम की नियुक्ति से पूर्व, डा. सिन्हा वित्त मंत्री के कार्यालय में निदेशक के रूप में तैनात थे ।

डा. सिन्हा ने नेशनल ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मेनेजमेंट (एनजीएसएम), आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू), केनबरा, आस्ट्रेलिया से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल स्टडीज, यूनिवर्सिटी ऑफ देहली से पीएचडी की है । उनके डाक्टरेट शोध का विषय "भारत में आईपीओज का मूल्यांकन - एक अनुभवजन्य अध्ययन" था । डा. सिन्हा ने कैम्पस लॉ सेन्टर, यूनिवर्सिटी ऑफ देहली से लॉ की डिग्री भी प्राप्त की है ।

आईएफसीआई लि. के अतिरिक्त, डा. सिन्हा सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया के निदेशक बोर्ड में भी भारत सरकार के नामित निदेशक हैं ।

 

 

 

 

 

 

 

सुश्री अनन्दिता सिन्हारे

 

 

सुश्री अनन्दिता सिन्हारे भारतीय सांख्यिकी सेवा (2000) अधिकारी हैं जो वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं । उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता से सांख्यिकी में स्नातकोत्तर किया है ।

उन्हें राष्ट्रीय खातों और वित्तीय समावेशन का 20 वर्षों से भी अधिक का अनुभव है । इस समय, आईएफसीआई के अतिरिक्त, वह दि ओरिएन्टल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड तथा इण्डिया पोस्ट पेमेन्ट्स बैंक लिमिटेड के बोर्ड में भी हैं ।

 

 

 

 

प्रो. एन. बालाकृष्णन्

 

 

प्रौफेसर एन. बालाकृष्णन् इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ साइंस में आईएनएसए (इण्डियन नेशनल साइंस एकेडमी) वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं । उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ एरोस्पेस इंजीनियरिंग में सहायक प्रौफेसर के रूप में कार्य-ग्रहण किया । वह इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ साइंस में असोसिएट डायरेक्टर, सूचना विज्ञान प्रभाग में अध्यक्ष तथा सुपरकम्प्यूटर एड्यूकेशन एण्ड रिसर्च सेन्टर में अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं ।

उन्होंने 1972 में मद्रास विश्वविद्यालय से इलैक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्युनिकेशन में बी.ई.(आनर्स) तथा 1979 में भारतीय विज्ञान संस्थान से पीएच.डी की थी। वह वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसिज (टीडब्ल्यूएएस), इण्डियन नेशनल साइंस एकेडमी, इण्डियन एकेडमी ऑफ साइंसिज, इण्डियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसिज तथा इन्स्टिट्यूटशन ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स के फैलो हैं ।

प्रौफेसर एन. बालाकृष्णन् को 2002 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री पुरस्कार सहित अनेक उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जैसे 2013 में इण्डियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग से प्रौफेसर एस एन मित्रा मेमोरियल अवार्ड, 2013 में आईईटीई डायमंड जुबली मेडल, 2004 में एप्लाइड सांइसिज के लिए होमी जे. भाभा अवार्ड, 2007 में जेसी बोस नेशनल फैलोशिप, 2001 में आईआईएससी द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के लिए एल्युमिनी अवार्ड फार एक्सीलेंस और 2000 में इण्डियन नेशनल साइंस कांग्रेस का मिलेनियम मेडल आदि ।

प्रौफेसर एन. बालाकृष्णन् डाटा सिक्युरिटी काउंसिल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष थे और इस समय उनके निदेशकों में से एक हैं।

आईएफसीआई के अतिरिक्त, प्रो. एन. बालाकृष्णन् इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ इन्फारमेंशन टैक्नोलॉजी और मेनेजमेंट, केरल और इक्विटाज स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के बोर्ड में भी हैं । वह अतीत में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारी बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं । वह भारत इलैक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बीईएल) में निदेशक तथा भारतीय दूर-संचार नियामक प्राधिकरण के अंशकालिक सदस्य भी रह चुके हैं ।

 

 

प्रो. अरविन्द सहाय

 

प्रो. अरविन्द सहाय मार्किटिंग एण्ड इन्टरनेशनल बिजनेस के प्रोफेसर हैं तथा आईआईएम, अहमदाबाद में डीन (एल्युमनी एण्ड एक्सटर्नल रिलेशन्स) हैं । उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस ऑस्टिन से पीएचडी तथा आईआईटी कानपुर से बी.टैक किया है । उन्होंने आईआईएम, अहमदाबाद से बिजनेस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है ।

प्रो. सहाय ने 50 से अधिक मामलों का लेखन किया है तथा जो प्रतिष्ठित अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं जैसे जर्नल ऑफ मार्किटिंग, जर्नल ऑफ प्रॉडक्ट इनोवेशन मेनेजमेंट, जर्नल ऑफ इन्टरनेशनल बिजनेस स्टडीज, स्लोन मेनेजमेंट रिव्यू, विकल्प, दि जर्नल ऑफ एकेडमी ऑफ मार्किटिंग साइंस एण्ड जर्नल ऑफ इण्डियन बिजनेस रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं । दि जर्नल ऑफ एकेडमी ऑफ मार्किटिंग साइंस पर उनका लेख मार्किटंग विषय पर सर्वाधिक उल्लेखनीय लेखों में से एक है । वह आऊटलुक बिजनेस पत्रिका में मार्किटिंग स्ट्रेटजी पर लिखने वाले नियमित स्तम्भ लेखक रहे हैं और उन्होंने अर्थव्यवस्था व कारोबार पर प्रतिष्ठित भारतीय कारोबारी समाचार-पत्र, फाइनेंशियल एक्सप्रैस के लिए लेख भी लिखे हैं । उन्होंने मार्किटिंग स्ट्रेटजी पर केसिज इन प्राइजिंग, मार्किटिंग कम्युनिकेशन्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूशन नामक एक केस बुक भी लिखी है ।

प्रोफेसर सहाय ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस, ऑस्टिन से यूनविर्सिटी वाइड आउटस्टेंडिंग डिसॅटेशॅन (शोध प्रबन्ध) अवार्ड (पीएचडी शोध प्रबन्ध के लिए), लंदन बिजनेस स्कूल से इनोवेशन इन टीचिंग अवार्ड तथा मार्किटिंग मेनेजमेंट में देवांग मेहता बेस्ट टीचर अवार्ड तथा यूटीवी ब्लूमबर्ग से भारत के बैस्ट मार्किटिंग प्रोफेसर का अवार्ड प्राप्त किया है । वह हारवर्ड बिजनेस स्कूल द्वारा इन्स्टीट्यूट ऑफ कम्पेटेटिवनैस लिस्ट, थिंकर्स50 इण्डिया की सूची में भी नामित किए गए थे ।

प्रोफेसर सहाय ईएडीए (स्पेन), कालेज ऑफ विलियम एण्ड मैरी (यूएसए) के मेसोन स्कूल, आस्टिन (यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, आईआईएम, लखनऊ, एशियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (वियतनाम), गार्डन इन्स्टीट्यूट ऑफ बिजनेस साईंस, यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया (साऊथ अफ्रीका) एसपी जैन इन्स्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट रिसर्च (सिंगापुर, दुबई), रिटेल एलायंस (दुबई) तथा इण्डियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद के अतिथि प्रोफेसर रहे हैं ।

आईएफसीआई के अतिरिक्त, प्रोफेसर सहाय ब्रेंडस्केप्स कंस्ल्टेंसी प्रा. लि., एचआईएल लि. तथा मैटर मोटर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड में भी हैं ।

 

 

श्री एमएमएल वर्मा

 

 

श्री एमएमएल वर्मा ने अंग्रेजी में एम.ए. तथा एम.फिल किया हुआ है । श्री वर्मा ने अपना कॅरियर अंग्रेजी अध्यापक के रूप में आरम्भ किया और तत्पश्चात् उन्होंने 1983-85 के दौरान उत्तर प्रदेश में सीमा शुल्क व केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के निरीक्षक के रूप में कार्य किया । इसके बाद उन्होंने 1985 में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जीवन बीमा निगम में कार्य-ग्रहण किया और समग्र देश के विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न पदों पर कार्य किया । श्री वर्मा जीवन बीमा निगम से कार्यपालक निदेशक के रूप में 2020 में सेवानिवृत्त हुए ।

जीवन बीमा निगम में उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान तथा दिल्ली आदि सहित विभिन्न स्थानों पर कार्य किया । उन्होंने वरिष्ठ शाखा प्रबन्धक (प्रभारी), काशीपुर व पीलीभीत, शाखा प्रबन्धक हल्द्वानी मंडल सहित विभिन्न पदों पर कार्य किया । जीवन बीमा निगम के मुम्बई कार्यालय में तैनाती के दौरान उन्होंने विपणन प्रबन्धक के रूप में भी कार्य किया । जीवन बीमा निगम में उनके कार्यकाल के अन्तिम भाग में, श्री वर्मा ने पश्चिमी अंचल कार्यालय के कारोबार विकास प्रबन्धक, मुम्बई डिवीजन-II व डिवीजन-III के वरिष्ठ प्रभागीय प्रबन्धक (प्रभारी), उत्तरी अंचल कार्यालय में सचिव (सीआरएम), निवेश (अनुवर्तन व लेखे) के मुख्य तथा निवेश (परिचालन) विभागों के मुख्य के रूप में कार्य किया । उनके कॅरियर में, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों जैसे कारोबार विकास, निवेश व विपणन आदि में गहन अनुभव प्राप्त किया । उन्होंने उत्तर मध्य अंचल प्रशिक्षण केन्द्र, आगरा में निदेशक के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड सहित उत्तर मध्य अंचल के कनिष्ठ स्तर के कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया । वे बीमा कम्पनियों की कार्यकारी परिषद, मुम्बई के कार्यालय में महासचिव के पद पर भी रहे ।

जीवन बीमा निगम में उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने एजेंटों के लिए "अभिकर्ता प्राइमर" तथा "जीवन सुरक्षा प्राइमर" नामक विभिन्न पुस्तकों का लेखन भी किया जो डिवीजन द्वारा शासकीय रूप से प्रकाशित की गईं । श्री वर्मा ने "की मैन इंश्योरेंस", "डी-रिटर्न प्राइमर" तथा "अन्डरराइटिंग प्राइमर" नामक तीन पुस्तकों का लेखन भी किया इन्हें भी डिवीजन द्वारा एजेंटों के लिए शासकीय रूप से प्रकाशित किया गया । इसके अतिरिक्त, उन्होंने "एजेंट्स किट" (लगभग 1400 पृष्ठों की 5 पुस्तकों का एक सैट) पुस्तक तथा "यूलिप प्राइमर" (दोनों जीवन बीमा निगम के केन्द्रीय कार्यालय द्वारा प्रकाशित की गईं) पुस्तक तथा बीमा कम्पनियों की कार्यकारी परिषद के का

आईएफसीआई लिमिटेड के अतिरिक्त, श्री एमएमएल वर्मा मानुस लीडरशिप फाउंडेशन के बोर्ड में भी हैं ।