निदेशक बोर्ड

                                                                           

बोर्ड स्तरीय समितियों की संरचना

डा. ईमांदी संकरा राव

प्रबन्ध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी

 

डा. ईमांदी संकरा राव इस समय आईएफसीआई लि., भारत सरकार का उपक्रम, के प्रबन्ध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं । आईएफसीआई सबसे पुराना वित्तीय संस्थान है और यह देश का प्रथम विकास वित्त संस्थान है, जिसे 1948 में स्थापित किया गया था तथा अवस्थापना व उद्योग के विकास की मार्फत भारतीय आर्थिक वृद्धि में सहयोग कर रहा है । डा. राव आईएफसीआई समूह की कम्पनियों और संस्थानों जैसे स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लि., आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लि., आईएफसीआई फैक्टर्स लि., प्रबन्ध विकास संस्थान - गुड़गावं तथा मुर्शीदाबाद व इन्स्टिट्यूट ऑफ लीडरशिप डिवेलपमेंट के अध्यक्ष भी हैं । वह आईआईटी बॉम्बे (पीएचडी) तथा आईआईटी खड़कपुर (एम.टैक), पांडिचेरी सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी (पीजीडीबीए) और आन्ध्रा यूनिवर्सिटी (बीई इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग) के छात्र रहे हैं ।

आईएफसीआई लिमिटेड में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व, डा. राव ने अग्रणी वित्तीय संस्थानों - आईआईएफसीएल व आईडीएफसी में 30 वर्ष से अधिक कार्य किया है । उन्हें परियोजना तथा निगमित वित्त, प्राइवेट इक्विटी, निवेश बैंकिंग, अवस्थापना विकास तथा दीर्घकालिक निधियां जुटाने (घरेलू व विदेशी दोनों) का गहन अनुभव है । वह आईआईएफसीएल एसेट मेनेजमेंट कम्पनी लि. के संस्थापक निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा आईआईएफसीएल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के संस्थापक निदेशक तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे तथा उन्होंने आईडीएफसी ग्रुप में निदेशक तथा कारोबार प्रमुख के रूप में भी कार्य किया है ।

डा. राव 12वीं पंचवर्षीय योजना के अवस्थापना वित्त (आरबीआई तथा पूर्ववर्ती नीति आयोग के बचत सूत्रीकरण पर कार्यकारी समूह के अधीन) सम्बन्धी उप-समूह के सदस्य, 12वीं पंचवर्षीय योजना के शहरी अवस्थापना के वित्तीयकरण के उप समूह के सदस्य तथा वित्त मंत्रालय में ऋण बाजार विकास सम्बन्धी डीएफएस समिति के सदस्य रहे तथा उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों एवं कार्यशालाओं में दस्तावेज प्रस्तुत करने तथा अनुसंधान सम्बन्धी कार्य में योगदान किया । हाल ही में उन्हें वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए विश्व प्रतिष्ठित एशिया पैसिफिक इन्टरप्राइज पुरस्कार प्रदान किया गया ।

बैंकिंग तथा वित्त के विशेषज्ञ होने के अतिरिक्त, डा. राव विद्याविद, कौशल विकास करने वाले तथा नए कारोबार को प्रोत्साहित करने वाले, सामाजिक सुधारक तथा एक कृषक भी हैं । इस समय आईएफसीआई के अतिरिक्त, वे स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लि., आईएफसीआई फैक्टर्स लि., आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लि., आईएफसीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट लि., प्रबन्ध विकास संस्थान, इन्स्टिट्यूट ऑफ लीडरशिप डिवेलपमेंट तथा भारतीय उद्यमीयता विकास संस्थान के बोर्ड में भी हैं ।

 

डा. भूषण कुमार सिन्हा

 

डा. भूषण कुमार सिन्हा भारतीय आर्थिक सेवा के 1993 बैच के अधिकारी हैं । इस समय वह वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में संयुक्त सचिव के रूप में तैनात हैं ।

वर्ष 1993 में भारतीय आर्थिक सेवा में उनका प्रवेश उस समय हुआ जब भारत में आर्थिक सुधार प्रक्रिया आरम्भ हुई थी । तब से आईईएस के सदस्य के रूप में डा. सिन्हा ने विविध आर्थिक व वित्तीय मुद्दों जैसे अन्तरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों से भारतीय निगमों के लिए वित्त उपलब्ध कराना, देश के लिए विवेकसम्मत ऋण प्रबन्धन के समग्र ढांचे में बाह्य वाणिज्यिक ऋण प्रवाह को नियमित करना, भारतीय प्रतिभूति बाजार का विकास व उसका विनियमन, भारत सरकार के लिए पेंशन क्षेत्र के सुधारों का आरम्भ एवं समन्वय, भारतीय एमएसएमईसीज के प्रवर्तन एवं विकास के लिए नीतियां बनाना व उनका कार्यान्वयन पर कार्य किया ।

मई, 2018 में डीएफएस में कार्य-ग्रहण करने से पूर्व, डा. सिन्हा ने निवेश व सार्वजनिक परिसम्पत्ति प्रबन्धन विभाग (डीआईपीएएम) में आर्थिक सलाहकार के रूप में तीन वर्ष तक कार्य किया । इस अवधि के दौरान, भारत सरकार की पॉलिसी में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में "निवेश आधारित प्रक्रिया" से "निवेशों के कुशल प्रबन्धन" के सिद्धांत में परिवर्तन के प्रतिमान विस्थापन में वे अग्रणी रहे । डीआईपीएएम की नियुक्ति से पूर्व, डा. सिन्हा वित्त मंत्री के कार्यालय में निदेशक के रूप में तैनात थे ।

डा. सिन्हा ने नेशनल ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मेनेजमेंट (एनजीएसएम), आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू), केनबरा, आस्ट्रेलिया से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल स्टडीज, यूनिवर्सिटी ऑफ देहली से पीएचडी की है । उनके डाक्टरेट शोध का विषय "भारत में आईपीओज का मूल्यांकन - एक अनुभवजन्य अध्ययन" था । डा. सिन्हा ने कैम्पस लॉ सेन्टर, यूनिवर्सिटी ऑफ देहली से लॉ की डिग्री भी प्राप्त की है ।

आईएफसीआई लि. के अतिरिक्त, डा. सिन्हा सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया के निदेशक बोर्ड में भी भारत सरकार के नामित निदेशक हैं ।

 

 

श्री अंशुमन शर्मा

 

 

श्री अंशुमन शर्मा 2005 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं और उन्हें लगभग 14 वर्ष का अनुभव है । नई दिल्ली, मुम्बई, चण्डीगढ़ आदि सहित कई स्थानों पर उनकी तैनाती हुई । श्री अंशुमन शर्मा ने मूल्य-अन्तरण तथा कर-निर्धारण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य किया । इस समय श्री अंशुमन शर्मा वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग में उप सचिव के रूप में तैनात हैं ।

श्री अंशुमन शर्मा, जो प्रबन्धन में स्नातकोत्तर हैं, का व्यक्तित्व बहु-आयामी है, जिन्हें अन्य बातों के साथ-साथ पढ़ने, यात्रा करने तथा ट्रेकिंग में रुचि है ।

आईएफसीआई लिमिटेड के अतिरिक्त, श्री अंशुमन शर्मा इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक लिमिटेड तथा आईडीएफसी लिमिटेड के बोर्ड में भी हैं ।

 

 

सुश्री किरण सहदेव

 

 

सुश्री किरण सहदेव ने वर्ष 1984 में 13वें बैच की सीधी भर्ती अधिकारी के रूप में भारतीय जीवन बीमा निगम में कार्यभार ग्रहण किया । तीन दशक से ऊपर के अपने कार्यकाल में इन्होने केन्द्रीय कार्यालय में सचिव (कार्मिक प्रशासन / इआर), केन्द्रीय व उत्तरी ज़ोन के क्षेत्रीय प्रबन्घक (कार्मिक व आइ आर) और उत्तरी ज़ोन के क्षेत्रीय प्रबन्घक (सम्पदा / ओएस ) जैसे कई चुनौतीपूर्ण दत्तकार्य किए । कार्मिक व औधोगिक सम्बन्धों के प्रबन्धन में 12 वर्ष के गहन अनुभव ने इन्हें इस क्षेत्र का विशेषज्ञ बना दिया । कारपोरेट एलआईसी में टीम एलआईसी के सदस्य के रूप में ये कार्यशैली में व्यवसायिकता बढ़ाने और निगमित शासन प्रणाली को सुघारने के लिए सुढृढ प्रणालियों को विकसित करने में तत्पर रहीं ।

सुश्री सहदेव आईएसबी, हैदराबाद, आईआईएम (अहमदाबाद) और एशियन इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मनीला, फिलीपींस सहित प्रतिष्ठित भारतीय व अन्तरराष्ट्रिय संस्थानो में कार्यकारी श्रेष्ठता और नेत्रृत्व में गहन रूप से प्रशिक्षित हैं ।

जीसस एण्ड मेरी कॉलेज, दिल्ली से अंग्रेजी साहित्य में मेजर और दिल्ली विश्वविद्दालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर सुश्री किरण सहदेव बहुमुखी प्रतिभाओ की धनी हैं जिन्हे संगीत, अध्ययन व रंगमंच में विशेष रुचि है । कला प्रेमी होने के नाते उनकी सोच बहुत कलात्मक है तथा प्राचीन इतिहास तथा सांस्कृतिक कलाओं की प्रशंसक हैं ।

 

 

प्रो. एन. बालाकृष्णन्

 

 

प्रोफेसर एन. बालाकृष्णन् डिपार्टमेंट ऑफ एरोस्पेस इंजीनियरिंग तथा सुपरकम्प्यूटर एड्यूकेशन एण्ड रिसर्च सेन्टर में मानद प्रोफेसर हैं । उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ एरोस्पेस इंजीनियरिंग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य-ग्रहण किया । वह भारतीय विज्ञान संस्थान में असोसिएट डायरेक्टर, सूचना विज्ञान प्रभाग में अध्यक्ष तथा सुपरकम्प्यूटर एड्यूकेशन एण्ड रिसर्च सेन्टर में अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं ।

उन्होंने 1972 में मद्रास विश्वविद्यालय से इलैक्ट्रोनिक्स एण्ड कम्युनिकेशन में बी.ई.(आनर्स) तथा 1979 में भारतीय विज्ञान संस्थान से पीएच.डी की थी। वह वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसिज (टीडब्ल्यूएएस), इण्डियन नेशनल साइंस एकेडमी, इण्डियन एकेडमी ऑफ साइंसिज, इण्डियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसिज तथा इन्स्टिट्यूटशन ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स के फैलो हैं ।

प्रोफेसर एन. बालाकृष्णन् को 2002 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री पुरस्कार सहित अनेक उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जैसे 2013 में इण्डियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग से प्रौफेसर एस एन मित्रा मेमोरियल अवार्ड, 2013 में आईईटीई डायमंड जुबली मेडल, 2004 में एप्लाइड सांइसिज के लिए होमी जे. भाभा अवा‌र्ड, 2007 में जेसी बोस नेशनल फैलोशिप, 2001 में आईआईएससी द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के लिए एल्युमिनी अवार्ड फार एक्सीलेंस और 2000 में इण्डियन नेशनल साइंस कांग्रेस का मिलेनियम मेडल आदि ।

प्रोफेसर एन. बालाकृष्णन् डाटा सिक्युरिटी काउंसिल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष थे और इस समय उनके निदेशकों में से एक हैं।

आईएफसीआई के अतिरिक्त, प्रो. एन. बालाकृष्णन् इण्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ इन्फारमेंशन टैक्नोलॉजी और मेनेजमेंट, केरल और इक्विटाज स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के बोर्ड में भी हैं । वह अतीत में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारी बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं । वह भारत इलैक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (बीईएल) में निदेशक तथा भारतीय दूर-संचार नियामक प्राधिकरण के अंशकालिक सदस्य भी रह चुके हैं ।

 

 

प्रो. अरविन्द सहाय

 

 

प्रो. अरविन्द सहाय मार्किटिंग एण्ड इन्टरनेशनल बिजनेस के प्रोफेसर हैं तथा आईआईएम, अहमदाबाद में डीन (एल्युमनी एण्ड एक्सटर्नल रिलेशन्स) हैं । उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस ऑस्टिन से पीएचडी तथा आईआईटी कानपुर से बी.टैक किया है । उन्होंने आईआईएम, अहमदाबाद से बिजनेस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है ।

प्रो. सहाय ने 50 से अधिक मामलों का लेखन किया है तथा जो प्रतिष्ठित अन्तरराष्ट्रीय पत्रिकाओं जैसे जर्नल ऑफ मार्किटिंग, जर्नल ऑफ प्रॉडक्ट इनोवेशन मेनेजमेंट, जर्नल ऑफ इन्टरनेशनल बिजनेस स्टडीज, स्लोन मेनेजमेंट रिव्यू, विकल्प, दि जर्नल ऑफ एकेडमी ऑफ मार्किटिंग साइंस एण्ड जर्नल ऑफ इण्डियन बिजनेस रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं । दि जर्नल ऑफ एकेडमी ऑफ मार्किटिंग साइंस पर उनका लेख मार्किटंग विषय पर सर्वाधिक उल्लेखनीय लेखों में से एक है । वह आऊटलुक बिजनेस पत्रिका में मार्किटिंग स्ट्रेटजी पर लिखने वाले नियमित स्तम्भ लेखक रहे हैं और उन्होंने अर्थव्यवस्था व कारोबार पर प्रतिष्ठित भारतीय कारोबारी समाचार-पत्र, फाइनेंशियल एक्सप्रैस के लिए लेख भी लिखे हैं । उन्होंने मार्किटिंग स्ट्रेटजी पर केसिज इन प्राइजिंग, मार्किटिंग कम्युनिकेशन्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूशन नामक एक केस बुक भी लिखी है ।

प्रोफेसर सहाय ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस, ऑस्टिन से यूनविर्सिटी वाइड आउटस्टेंडिंग डिसॅटेशॅन (शोध प्रबन्ध) अवार्ड (पीएचडी शोध प्रबन्ध के लिए), लंदन बिजनेस स्कूल से इनोवेशन इन टीचिंग अवार्ड तथा मार्किटिंग मेनेजमेंट में देवांग मेहता बेस्ट टीचर अवार्ड तथा यूटीवी ब्लूमबर्ग से भारत के बैस्ट मार्किटिंग प्रोफेसर का अवार्ड प्राप्त किया है । वह हारवर्ड बिजनेस स्कूल द्वारा इन्स्टीट्यूट ऑफ कम्पेटेटिवनैस लिस्ट, थिंकर्स50 इण्डिया की सूची में भी नामित किए गए थे ।

प्रोफेसर सहाय ईएडीए (स्पेन), कालेज ऑफ विलियम एण्ड मैरी (यूएसए) के मेसोन स्कूल, आस्टिन (यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, आईआईएम, लखनऊ, एशियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (वियतनाम), गार्डन इन्स्टीट्यूट ऑफ बिजनेस साईंस, यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया (साऊथ अफ्रीका) एसपी जैन इन्स्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट रिसर्च (सिंगापुर, दुबई), रिटेल एलायंस (दुबई) तथा इण्डियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद के अतिथि प्रोफेसर रहे हैं ।

आईएफसीआई के अतिरिक्त, प्रोफेसर सहाय ब्रेंडस्केप्स कंस्ल्टेंसी प्रा. लि. तथा गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एण्ड कैमिकल्स लि. (जीएनएफसी) तथा एचआईएल लि. के बोर्ड में भी हैं ।

 

                                                                                    

निदेशक बोर्ड की विभिन्न समितियों के गठन(विवरण संलग्न हैं)