राष्ट्रीय ग्रामीण विकास निधि (आरजीवीएन)
अरुणा कॉम्प्लेक्स, ऑफ अलविदा लेन नं ८ , राजगढ़ रोड,
गुवाहाटी- ७८१ ००३, असम.
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आरजीवीएन की स्थापना ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के गरीबों, शारीरिक व सामाजिक-आर्थिक रूप से अक्षम लोगों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान में लगे स्वैच्छिक संगठनों का प्रवर्तन, सहायता तथा उनका विकास करने, आर्थिक विकास की गति व स्तर में सुधार, आर्थिक विकास में वृद्धि, विशेष रूप में ग्राम व विकेन्द्रीकृत क्षेत्रों से सम्बन्धित, समाज के गैर-सुविधा प्राप्त समूहों पर ध्यान केन्द्रित करने, परंतु जिनमें सामाजिक व आर्थिक रूप से उत्पादक क्रियाकलाप करने की क्षमता हो, ग्रामीण व शहरी गरीबों, विशेषकर आदिवासी, अनुसूचित जाति, महिलाओं और बच्चों की आर्थिक जीविका में सहायता के लिए वर्ष 1860 के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अधीन लाभ न कमाने वाले स्वायत संगठन के रूप में अप्रैल, 1990 में की गई थी, जिसका मुख्यालय गुवाहाटी में है ।

 

आरजीवीएन का बुनियादी प्रवर्तक होने के नाते आईएफसीआई ने इसकी स्थापना से सम्बन्धित प्रारम्भिक सहायता प्रदान की और समय के साथ-साथ इण्डस्ट्रियल डिवेलपमेंट बैंक ऑफ इण्डिया (आईडीबीआई), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और टाटा सोशल वेलपेयर ट्रस्ट (टीएसडब्ल्यूटी) भी इसके प्रवर्तक बन गए । आरजीवीएन एक राष्ट्र स्तरीय बहु-राज्यीय विकास एवं सहायता संगठन है, जो आसाम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, सिकिम्म, उड़ीसा, झारखंड और बिहार में कार्य कर रही है । पूर्वोत्तर में अपने कार्यों का विस्तार और छत्तीसगढ़ के गरीबी से प्रभावित क्षेत्रों तक भी फैल गए हैं । आरजीवीएन की प्रमुख शक्ति गैर-सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के इसके नेटवर्क से आती है, जो बड़ी परियोजनाओं को चलाने में सक्षम है । कई वर्षों से आरजीवीएन विभिन्न रोजगार बढ़ावा कार्यक्रमों में शामिल लघु समुदाय आधारित संगठनों को प्रशिक्षित करने और सहायता प्रदान करने में सफल रहा है ।